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shrikrishnashram bolundra।।श्री कृष्णाश्रम,बोलुन्दरा।।

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नवरात्री नवदुर्गा स्वरूप

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१ नवरात्री नवदुर्गा स्वरूप भाग-1 https://youtu.be/LX14_aGXQGM 2नवरात्री का प्रथम दिन देवी शैलपुत्री भाग-2 https://youtu.be/uPU7GIZ6gSM 3 नवरात्री का द्वितीय दिन देवी ब्रह्मचारिणी का महात्म्य ,मन्त्र भाग-3 https://youtu.be/cOIaya1FC3k 4 नवरात्री  का तृतीय दिन देवी चंद्रघंटा का महात्म्य , मन्त्र भाग- 4 https://youtu.be/V8FLarS4Dws 5नवरात्री का चतुर्थ दिन देवी कूष्माण्डा का महात्म्य, मन्त्र भाग -5 https://youtu.be/PACfbhVboxQ 6नवरात्री का पंचम दिन देवी स्कंदमाता का महात्म्य, मन्त्र भाग- 6 https://youtu.be/Kd9qRAL78ck 7.नवरात्री का षष्ठम दिन देवी कात्यायनी का महात्म्य,मन्त्र भाग -7 https://youtu.be/3iSYvGXarfY 8नवरात्री का सप्तम दिन देवी कालरात्री का महात्म्य, मन्त्र भाग- 8 https://youtu.be/pdHWQHZL8VA 9.नवरात्री का अष्टम दिन देवी महागौरी का महात्म्य,मन्त्र भाग- 9 https://youtu.be/ pLbWEoKIAVs 10. नवरात्री का नवम  दिन देवी सिद्धिदात्री का महात्म्य,मन्त्र भाग-10 https://youtu.be/kFojhX-5B8s 11.विजयादशमी का महात्म्य भाग-11 https://youtu.be/9Kc8KM3...

गणेशपञ्चरत्न स्त्रोतम् ।श्रीमत् शङ्कराचार्य रचित। आरोग्यता, निर्विघ्नता...

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गणेशपञ्चरत्नम्   मुदा करात्तमोदकं सदा विमुक्तिसाधकं  कलाधरावतंसकं विलासिलोकरञ्जकम्  अनायकैकनायकं विनाशितेभदैत्यकं नताशुभाशुनाशकं नमामि तं विनायकम् ॥ नतेतरातिभीकरं नवोदितार्कभास्वरं नमत्सुरारिनिर्जरं नताधिकापदुद्धरम् सुरेश्वरं निधीश्वरं गजेश्वरं गणेश्वरं   महेश्वरं तमाश्रये परात्परं निरन्तरम् ।।२ ।।   समस्तलोकशङ्करं निरस्तदैत्यकुञ्जरं  दरेतरोदरं वरं वरेभवक्त्रमक्षरम् ।  कृपाकरं क्षमाकरं मुदाकरं यशस्करं  नमस्करं नमस्कृतां नमस्करोमि भास्वरम् ॥ ३ ॥ अकिंचनार्तिमार्जनं चिरन्तनोक्तिभाजनं  पुरारिपूर्वनन्दनं सुरारिगर्वचर्वणम् ।  प्रपञ्चनाशभीषणं धनञ्जयादिभूषणं  कपोलदानवारणं भजे पुराणवारणम् ॥४ ॥  नितान्तकान्तदन्तकान्तिमन्तकान्तकात्मज मचिन्त्यरूपमन्तहीनमन्तरायकृन्तनम्  हृदन्तरे निरन्तरं वसन्तमेव योगिनां  तमेकदन्तमेव तं विचिन्तयामि संततम् ॥ ५ ॥  महागणेशपञ्चरत्नमादरेण योऽन्वहं  प्रगायति प्रभातके हृदि स्मरन् गणेश्वरम् ।  अरोगतामदोषतां सुसाहिती सुपुत्रतां समाहितायुरष्टभूतिमभ्युपैति सोऽचिरात् ॥ ६ ॥  ...

।।शुक्र स्तोत्रम्।। shukra stotram।।

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    ॥ शुक्रस्तोत्रम् ॥ शुक्रः काव्यः शुक्ररेता शुक्लाम्बरधरः सुधीः । हिमाभः कुन्तघवलः शुभ्रांशुः शुक्लभूषणः ॥ १ ॥ नीतिज्ञो नीतिकृन्नीतिमार्गगामी ग्रहाधिपः । उशना वेदवेदाङ्गपारगः कविरात्मवित् ॥ २ ॥ भार्गवः करुणासिन्धुर्ज्ञानगम्यः सुतप्रदः । शुक्रस्यैतानि नामानि शुक्रं स्मृत्वा तु यः पठेत् ||3|| आयुर्धनं सुखं पुत्रं लक्ष्मी वसतिमुत्तमाम् । विद्यां चैव स्वयं तस्मै शुक्रस्तुष्टो ददाति च ॥ ४ ॥                   ॥ इति ॥ 

।।बृहस्पति स्तोत्रम् ।।

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॥ बृहस्पतिस्तोत्रम् ॥ गुरुर्बृहस्पतिर्जीव: सुराचार्यो विदांवरः । वागीशो धिषणो दीर्घश्मश्रुः पीताम्बरो युवा ॥ १ ॥ सुधादृष्टिग्रहाधीशो ग्रहपीडापहारकः । दयाकरः सौम्यमूर्तिः सुरार्च्यः कुंकुमद्युतिः ॥ २ ॥ लोकपूज्यो लोकगुरुर्नीतिज्ञो नीतिकारकः ।  तारापतिश्चांगिरसो वेदवैद्यपितामहः ॥ ३ ॥ भक्त्या बृहस्पतिं स्मृत्वा नामान्येतानि यः पठेत् । अरोगी बलवान् श्रीमान्पुत्रवान् स भवेन्नरः ॥ ४ ॥ जीवेद्वर्षशतं मर्त्यो पापं नश्यति नश्यति । यः पूजयेद् गुरुदिने पीतगन्धाक्षताम्बरैः ॥ ५ ॥ पुष्पदीपोपहारैश्च पूजनीयं बृहस्पतिम् । ब्राह्मणान्भोजयेत्तस्य पीडाशान्तिर्भवेद् गुरोः ॥ ६ ॥                           ॥ इति ॥ 

।। बुध स्त्रोत्रम् ।।

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 ॥ बुधस्तोत्रम् ॥ बुधो बुद्धिमतां श्रेष्ठो बुद्धिदाता धनप्रदः ।  प्रियंगुकलिकाश्यामः कंजनेत्रो मनोहरः ॥ १ ॥ ग्रहोपमो रौहिणेयो नक्षत्रेशो दयाकरः । विरुद्धकार्यहंता च सौम्यो बुद्धिविवर्धनः ॥ २ ॥ चन्द्रात्मजो विष्णुरूपी ज्ञानीज्ञो ज्ञानिनायकः । ग्रहपीडाहरो दारपुत्रधान्यपशुप्रदः ॥ ३ ॥ लोकप्रियः सौम्यमूर्तिर्गुणदो गुणिवत्सलः । पञ्चविंशति नामानि बुधस्यैतानि यः पठेत् ॥ ४॥ स्मृत्वा बुधं सदा तस्य पीडा सर्वा विनश्यति ।      तद्दिने वा पठेद्यस्तु लभते स मनोगतम् ॥ ५ ॥                          ॥ इति ॥ 

शिव-पूजनके लिये विहित पत्र-पुष्प।सहस्र गुना फल देने वाले पुष्प।भविष्य पु...

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शिव - पूजनके लिये विहित पत्र - पुष्प  भगवान् शंकरपर फूल चढ़ानेका बहुत अधिक महत्त्व है । बतलाया जाता है कि तपःशीलगुणोपेते विप्रे वेदस्य दत्त्वा सुवर्णस्य शतं तत्फलं कुसुमस्य च ॥ ( वीरमित्रोदय) तपःशील सर्वगुणसम्पन्न वेदमें निष्णात किसी ब्राह्मणको में सुवर्ण दान करनेपर जो फल प्राप्त होता है , वह भगवान् शंकरपर सौ फूल चढ़ा देनेसे प्राप्त हो जाता है । कौन - कौनसे पत्र - पुष्प शिवके लिये विहित है और कौन - कौन निषिद्ध हैं , इनकी जानकारी अपेक्षित है । अतः उनका उल्लेख यहाँ किया जाता है विष्णोर्यानीह चोक्तानि पुष्पाणि च पत्रिकाः । केतकीपुष्पमेकं तु विना तान्यखिलान्यपि । शस्तान्येव सुरश्रेष्ठ शंकराराधनाय हि ॥ ( नारद ) पहली बात यह है कि भगवान् विष्णुके लिये जो - जो पत्र और पुष्प विहित हैं , वे सब भगवान् शंकरपर भी चढ़ाये जाते हैं । केवल केतकी - केवड़ेका निषेध है । शास्त्रोंने कुछ फूलोंके चढ़ानेसे मिलनेवाले फलका तारतम्य बतलाया है , जैसे सर्वासा पुष्पजातीनां नीलमुत्पलम् ॥ ( वीरमित्रोदय , पूजाप्रकाश )   करवीरसमा ज्ञेया जातीबकुलपाटलाः । श्वेतमन्दारकुसुमं सितपा शमीपुष्पं बृहत्याश्च कुसु...