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आइए जाने ग्रहों की दिशा, जाति, दृष्टि ,उच्च नीच्च अंश |

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  ग्रहाणां राजत्वादिनिरुपणम्   राजा रविः शशधरश्च बुधः कुमारः सेनापतिः क्षितिसुतः सचिवौ सितेज्यौ ।  भृत्यस्तथा तरणिजः सबला ग्रहाश्च कुर्वन्ति जन्मसमये निजमेव रूपम्     ||  जातक शास्त्र में सर्यादि  ग्रहों में सूर्य और चन्द्र  को राजा , बुध को राजकुमार , भौम को सेनापति , गुरु और शुक्र को मन्त्री और शनि को सेवक माना गया है । फलादेश में इसका विशेष प्रयोजन होता है । । जातक की कुण्डली में जो ग्रह बली होता है वह ग्रह अपने अनुसार जातक को बनाता है |   उच्च नी च्चग्रहा : अजवृषभमृगाङ्गनाकुलीरा   झपवणीजौ      च     दिवाकरदितुंगा।   दशशिखिमनयुक्तिथीन्द्रियाशैस्त्रिनवकविंशतिभिश्च ते s स्तिनीचा : ।।     आओ इसे जाने  चक्र द्वारा |                                              उच्च ग्रह  राशिचक्रम्     ग्रहा: सू  .   चं .   मं ...

आइए जाने ग्रहों का स्वरूप |

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                  ग्रहा णां  स्वरुपम्  1 सूर्यस्य स्वरूपम्  चतुरस्रो नात्युच्चस्तनुकेशः पैत्तिको स्थिसारश्च | शूरो   मधुपिङ्गाक्षो   रक्तश्यामः   पृथुश्चार्कः || रवि चतुरस्र  शरीर, मध्यम उच्च, अल्पकेश से युक्त, पित्त प्रकृति वाला,मजबूत अस्थि वाला, वीर, मधुसदृश पिङ्गलनयन , रक्तश्याम वर्ण एवं स्थूलशरीर वाला है || 2 चन्द्रस्य स्वरूपम् स्वच्छ: प्राज्ञो गौरश्चपलः कफवातिको रूधिरसारः | मृदुवाग् घृणी प्रियसखस्तनुवृत्तश्चन्द्रमाः प्रांशुः||  चन्द्रमा स्वच्छ कान्तिवाला, मेधावी, गौरवर्ण, चञ्चल , कफ एवं वात प्रकृति, अत्यधिकरक्त वाला, मधुर बोलने वाला, दयावान, मित्र का प्रिय, कृश एवं गोल आकृति तथा उन्नत  शरीर वाला होता है | 3भौमस्य स्वरूपम् हिंस्र ह्रस्वस्तरूणः पिङ्गाक्ष: पैत्तिको दुराधर्षः| चपलः  सरक्तगौरो  मज्जासारश्च  माहेयः  || भौम हिंसक, छोटे शरीर बाल, युवक कपिलवर्णाकार नेत्र से युक्त, पित प...

आइए जाने जन्म कुंडली के द्वादश भाव |

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     जन्मकाल विचार उत्तमं   च  जलस्त्रावे    मध्यमम्   शीर्षदर्शने |         पतने   कनिष्टं    स्यात्त्रिविधं     जन्मलक्षणम्  ||     अर्थात बालक के जन्म के समय प्रथम  जल का श्राव  होता  है, उस समय बालक का  जन्मसमय उतम  माना जाता  है, क्योकि प्रथम द्वार खुल कर  बालक को हवा  लगती  है, उसके बाद शीर्ष के दिखने पर जन्मसमय  को  मध्यम   माना  जाता  है  तथा बालक के बार  आने पर जन्मसमय  कनिष्ठ  मत माना  जाता  है |    कुण्डली  ग्रहों के बारे में जान लिया और राशि के बारे में जान लिया । अब जानते हैं कुण्डली के बारे में । कुण्डली का खाका इस प्रकार है । थोडी देर इस खाके में लिखे हुए नम्बरों को भूल जाते हैं । यह जो उपर का बडा चौकौर हिस्सा है , इसे लग्न कहते हैं । लग्न को । पहला भाव भी कहते हैं और यहीं से भाव की गणना की जाती है । समझने के लिए...