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गणपति लक्ष्मी स्तोत्र | इसके पाठ से लक्ष्मीजी घर और शरीर को छोड़कर कभी नहीं जाती | Ganesh lakshmi |

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गणपति लक्ष्मी स्तोत्र | इसके पाठ से लक्ष्मीजी घर और शरीर को छोड़कर कभी नहीं जाती | Ganesh lakshmi | गणेश लक्ष्मी श्रीगणपतिस्तोत्रम् हिंदी अर्थ सहित ॐ नमो विघ्नराजाय सर्वसौख्यप्रदायिने । दुष्टारिष्टविनाशाय पराय परमात्मने ॥ १॥ सम्पूर्ण सौख्य प्रदान करने वाले सच्चिदानन्द स्वरुप विघ्नराज गणेश को नमस्कार है, जो दुष्ट अरिष्टग्रहों का नाश करने वाले परात्पर परमात्मा हैं । लम्बोदरं महावीर्यं नागयज्ञोपशोभितम् । अर्धचन्द्रधरं देवं विघ्नव्यूहविनाशनम् ॥ २॥ जो महापराक्रमी, लम्बोदर, सर्पमय, यज्ञोपवीत से सुशोभित अर्धचन्द्रधारी और विघ्न व्यूह का विनाश करने वाले हैं, उन गणपति की मैं वंदना करता हूँ । ॐ ह्रां ह्रीं ह्रूं ह्रैं ह्रौं ह्रः हेरम्बाय नमो नमः । सर्वसिद्धिप्रदोऽसि त्वं सिद्धिबुद्धिप्रदो भव ॥ ३॥ ॐ ह्रां ह्रीं ह्रूं ह्रैं ह्रौं ह्रः हेरम्ब को नमस्कार हैं । भगवान् आप सब सिद्धियों के दाता हैं, आप हमारे लिए सिद्धि – बुद्धिदायक हैं । चिन्तितार्थप्रदस्त्वं हि सततं मोदकप्रियः । सिन्दूरारुणवस्त्रैश्च पूजितो वरदायकः ॥ ४॥ आपको सदा ही मोदक प्रिय है, आप मन के द्वारा चिन्तित अर्थ को देनेवाले हैं,...

किस वार को कौनसा तिलक लगाए ? तिलक के चमत्कारिक उपाय

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  🌷ज्योतिष के अनुसार यदि तिलक धारण किया जाता है तो सभी पाप नष्ट हो जाते है सनातन धर्म में शैव, शाक्त, वैष्णव और अन्य मतों के अलग-अलग तिलक होते हैं। 🌷चंदन का तिलक लगाने से पापों का नाश होता है, व्यक्ति संकटों से बचता है, उस पर लक्ष्मी की कृपा हमेशा बनी रहती है, ज्ञानतंतु संयमित व सक्रिय रहते हैं। 🌷तिलक कई प्रकार के होते हैं - मृतिका, भस्म, चंदन, रोली, सिंदूर, गोपी आदि। 🚩यदि वार अनुसार तिलक धारण किया जाए तो उक्त वार से संबंधित ग्रहों को शुभ फल देने वाला बनाया जा सकता है। सोमवार के दिन कौनसा तिलक लगाए? https://youtube.com/shorts/9f-wAjP7g6I?feature=share मंगलवार के दिन कौनसा तिलक लगाए? https://youtube.com/shorts/C5IOKKSf4Pw?feature=share बुधवार के दिन कौनसा तिलक लगाए? https://youtube.com/shorts/SKZGwVewxrA?feature=share गुरुवार के दिन कौनसा तिलक लगाए? https://youtube.com/shorts/X_M1xv-XfJk?feature=share शुक्रवार के दिन कौनसा तिलक लगाए? https://youtube.com/shorts/MWVyecLgZK4?feature=share शनिवार के दिन कौनसा तिलक लगाए? https://youtube.com/shorts/MWVyecLgZK4?feature...

shrikrishnashram bolundra।।श्री कृष्णाश्रम,बोलुन्दरा।।

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नवरात्री नवदुर्गा स्वरूप

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१ नवरात्री नवदुर्गा स्वरूप भाग-1 https://youtu.be/LX14_aGXQGM 2नवरात्री का प्रथम दिन देवी शैलपुत्री भाग-2 https://youtu.be/uPU7GIZ6gSM 3 नवरात्री का द्वितीय दिन देवी ब्रह्मचारिणी का महात्म्य ,मन्त्र भाग-3 https://youtu.be/cOIaya1FC3k 4 नवरात्री  का तृतीय दिन देवी चंद्रघंटा का महात्म्य , मन्त्र भाग- 4 https://youtu.be/V8FLarS4Dws 5नवरात्री का चतुर्थ दिन देवी कूष्माण्डा का महात्म्य, मन्त्र भाग -5 https://youtu.be/PACfbhVboxQ 6नवरात्री का पंचम दिन देवी स्कंदमाता का महात्म्य, मन्त्र भाग- 6 https://youtu.be/Kd9qRAL78ck 7.नवरात्री का षष्ठम दिन देवी कात्यायनी का महात्म्य,मन्त्र भाग -7 https://youtu.be/3iSYvGXarfY 8नवरात्री का सप्तम दिन देवी कालरात्री का महात्म्य, मन्त्र भाग- 8 https://youtu.be/pdHWQHZL8VA 9.नवरात्री का अष्टम दिन देवी महागौरी का महात्म्य,मन्त्र भाग- 9 https://youtu.be/ pLbWEoKIAVs 10. नवरात्री का नवम  दिन देवी सिद्धिदात्री का महात्म्य,मन्त्र भाग-10 https://youtu.be/kFojhX-5B8s 11.विजयादशमी का महात्म्य भाग-11 https://youtu.be/9Kc8KM3...

गणेशपञ्चरत्न स्त्रोतम् ।श्रीमत् शङ्कराचार्य रचित। आरोग्यता, निर्विघ्नता...

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गणेशपञ्चरत्नम्   मुदा करात्तमोदकं सदा विमुक्तिसाधकं  कलाधरावतंसकं विलासिलोकरञ्जकम्  अनायकैकनायकं विनाशितेभदैत्यकं नताशुभाशुनाशकं नमामि तं विनायकम् ॥ नतेतरातिभीकरं नवोदितार्कभास्वरं नमत्सुरारिनिर्जरं नताधिकापदुद्धरम् सुरेश्वरं निधीश्वरं गजेश्वरं गणेश्वरं   महेश्वरं तमाश्रये परात्परं निरन्तरम् ।।२ ।।   समस्तलोकशङ्करं निरस्तदैत्यकुञ्जरं  दरेतरोदरं वरं वरेभवक्त्रमक्षरम् ।  कृपाकरं क्षमाकरं मुदाकरं यशस्करं  नमस्करं नमस्कृतां नमस्करोमि भास्वरम् ॥ ३ ॥ अकिंचनार्तिमार्जनं चिरन्तनोक्तिभाजनं  पुरारिपूर्वनन्दनं सुरारिगर्वचर्वणम् ।  प्रपञ्चनाशभीषणं धनञ्जयादिभूषणं  कपोलदानवारणं भजे पुराणवारणम् ॥४ ॥  नितान्तकान्तदन्तकान्तिमन्तकान्तकात्मज मचिन्त्यरूपमन्तहीनमन्तरायकृन्तनम्  हृदन्तरे निरन्तरं वसन्तमेव योगिनां  तमेकदन्तमेव तं विचिन्तयामि संततम् ॥ ५ ॥  महागणेशपञ्चरत्नमादरेण योऽन्वहं  प्रगायति प्रभातके हृदि स्मरन् गणेश्वरम् ।  अरोगतामदोषतां सुसाहिती सुपुत्रतां समाहितायुरष्टभूतिमभ्युपैति सोऽचिरात् ॥ ६ ॥  ...

।।शुक्र स्तोत्रम्।। shukra stotram।।

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    ॥ शुक्रस्तोत्रम् ॥ शुक्रः काव्यः शुक्ररेता शुक्लाम्बरधरः सुधीः । हिमाभः कुन्तघवलः शुभ्रांशुः शुक्लभूषणः ॥ १ ॥ नीतिज्ञो नीतिकृन्नीतिमार्गगामी ग्रहाधिपः । उशना वेदवेदाङ्गपारगः कविरात्मवित् ॥ २ ॥ भार्गवः करुणासिन्धुर्ज्ञानगम्यः सुतप्रदः । शुक्रस्यैतानि नामानि शुक्रं स्मृत्वा तु यः पठेत् ||3|| आयुर्धनं सुखं पुत्रं लक्ष्मी वसतिमुत्तमाम् । विद्यां चैव स्वयं तस्मै शुक्रस्तुष्टो ददाति च ॥ ४ ॥                   ॥ इति ॥ 

।।बृहस्पति स्तोत्रम् ।।

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॥ बृहस्पतिस्तोत्रम् ॥ गुरुर्बृहस्पतिर्जीव: सुराचार्यो विदांवरः । वागीशो धिषणो दीर्घश्मश्रुः पीताम्बरो युवा ॥ १ ॥ सुधादृष्टिग्रहाधीशो ग्रहपीडापहारकः । दयाकरः सौम्यमूर्तिः सुरार्च्यः कुंकुमद्युतिः ॥ २ ॥ लोकपूज्यो लोकगुरुर्नीतिज्ञो नीतिकारकः ।  तारापतिश्चांगिरसो वेदवैद्यपितामहः ॥ ३ ॥ भक्त्या बृहस्पतिं स्मृत्वा नामान्येतानि यः पठेत् । अरोगी बलवान् श्रीमान्पुत्रवान् स भवेन्नरः ॥ ४ ॥ जीवेद्वर्षशतं मर्त्यो पापं नश्यति नश्यति । यः पूजयेद् गुरुदिने पीतगन्धाक्षताम्बरैः ॥ ५ ॥ पुष्पदीपोपहारैश्च पूजनीयं बृहस्पतिम् । ब्राह्मणान्भोजयेत्तस्य पीडाशान्तिर्भवेद् गुरोः ॥ ६ ॥                           ॥ इति ॥ 

।। बुध स्त्रोत्रम् ।।

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 ॥ बुधस्तोत्रम् ॥ बुधो बुद्धिमतां श्रेष्ठो बुद्धिदाता धनप्रदः ।  प्रियंगुकलिकाश्यामः कंजनेत्रो मनोहरः ॥ १ ॥ ग्रहोपमो रौहिणेयो नक्षत्रेशो दयाकरः । विरुद्धकार्यहंता च सौम्यो बुद्धिविवर्धनः ॥ २ ॥ चन्द्रात्मजो विष्णुरूपी ज्ञानीज्ञो ज्ञानिनायकः । ग्रहपीडाहरो दारपुत्रधान्यपशुप्रदः ॥ ३ ॥ लोकप्रियः सौम्यमूर्तिर्गुणदो गुणिवत्सलः । पञ्चविंशति नामानि बुधस्यैतानि यः पठेत् ॥ ४॥ स्मृत्वा बुधं सदा तस्य पीडा सर्वा विनश्यति ।      तद्दिने वा पठेद्यस्तु लभते स मनोगतम् ॥ ५ ॥                          ॥ इति ॥ 

शिव-पूजनके लिये विहित पत्र-पुष्प।सहस्र गुना फल देने वाले पुष्प।भविष्य पु...

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शिव - पूजनके लिये विहित पत्र - पुष्प  भगवान् शंकरपर फूल चढ़ानेका बहुत अधिक महत्त्व है । बतलाया जाता है कि तपःशीलगुणोपेते विप्रे वेदस्य दत्त्वा सुवर्णस्य शतं तत्फलं कुसुमस्य च ॥ ( वीरमित्रोदय) तपःशील सर्वगुणसम्पन्न वेदमें निष्णात किसी ब्राह्मणको में सुवर्ण दान करनेपर जो फल प्राप्त होता है , वह भगवान् शंकरपर सौ फूल चढ़ा देनेसे प्राप्त हो जाता है । कौन - कौनसे पत्र - पुष्प शिवके लिये विहित है और कौन - कौन निषिद्ध हैं , इनकी जानकारी अपेक्षित है । अतः उनका उल्लेख यहाँ किया जाता है विष्णोर्यानीह चोक्तानि पुष्पाणि च पत्रिकाः । केतकीपुष्पमेकं तु विना तान्यखिलान्यपि । शस्तान्येव सुरश्रेष्ठ शंकराराधनाय हि ॥ ( नारद ) पहली बात यह है कि भगवान् विष्णुके लिये जो - जो पत्र और पुष्प विहित हैं , वे सब भगवान् शंकरपर भी चढ़ाये जाते हैं । केवल केतकी - केवड़ेका निषेध है । शास्त्रोंने कुछ फूलोंके चढ़ानेसे मिलनेवाले फलका तारतम्य बतलाया है , जैसे सर्वासा पुष्पजातीनां नीलमुत्पलम् ॥ ( वीरमित्रोदय , पूजाप्रकाश )   करवीरसमा ज्ञेया जातीबकुलपाटलाः । श्वेतमन्दारकुसुमं सितपा शमीपुष्पं बृहत्याश्च कुसु...

नवनाग स्तुति।कालसर्प दोष दुर करने वाला।

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॥ नवनागस्तुतिः ॥   अनन्तं वासुकिं शेषं पद्मनाभं च कम्बलम् ।  शङ्खपालं धार्तराष्ट्रं तक्षकं कालियं तथा ॥१ ॥  एतानि नव नामानि नागानां च महात्मनाम् ।  सायंकाले पठेन्नित्यं प्रातः काले विशेषतः ॥२ ॥  विषाद्भयं तस्य नास्ति सर्वत्र विजयी भवेत् ॥                ॥ इति ॥

प्रातःकालीन उठ कर करे इस स्तुति का पाठ शिव स्तुति: "सद्धर्मचिन्तामणौ"

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 ।।  अथ  शिवस्तुतिः ।।  प्रातः स्मरामि भवभीतिहरं सुरेशं  गङ्गाधरं वृषभवाहनमम्बिकेशम् ।  खट्वाड़्गशूलवरदाभयहस्तमीशं  संसाररोगहरमौषधमद्वितीयम् ॥ १।। प्रातर्नमामि गिरिशं गिरिजार्धदेहं सर्गस्थितिप्रलयकारणमादिदेवम् ।  विश्वेश्वरं विजितविश्वमनोभिरामं  संसाररोगहरमौषधमद्वितीयम् ॥ २।। प्रातर्भजामि शिवमेकमनन्तमाद्यं  वेदान्तवेद्यमनघं पुरुषं महान्तम् ।  नामादिभेदरहितं षडभावशून्यं  संसाररोगहरमौषधमदितीयम् ।।३।।  प्रातः समुत्थाय शिवं विचिन्त्य श्लोकत्रयं येऽनुदिनं पठन्ति ।  ते दुःखजातं बहुजन्मसञ्चितं हित्वा पदं यान्ति तदेव शम्भोः । ।।इति शिवस्तुतिः  सद्धर्मचिन्तामणौ।।

।।मंगल स्त्रोत्रम् ।। mangal stotram

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          ॥ मंगलस्तोत्रम् ॥ मंगलो भूमिपुत्रश्च ऋणहर्ता धनप्रदः । स्थिरासनो महाकायः सर्वकर्मविरोधकः ॥ १ ॥ लोहितो लोहिताक्षश्च सामगानां कृपाकरः । धरात्मजः कुजो भौमो भूतिदो भूमिनन्दनः ॥ २ ॥ अंगारको यमश्चैव सर्वरोगापहारकः । वृष्टेः कर्ताऽपहर्ता च सर्वकामफलप्रदः ॥ ३ ॥ एतानि कुजनामानि नित्यं यः श्रद्धया पठेत् । ऋणं न जायते तस्य धनं शीघ्रमवाप्नुयात् ॥ ४ ॥ धरणीगर्भसम्भूतं विद्युत्कान्तिसमप्रभम् । कुमारं शक्तिहस्तं च मङ्गलं प्रणमाम्यहम् ॥ ५ ॥ स्तोत्रमंगारकस्यैतत्पठनीयं सदा नृभिः । न तेषां भौमजा पीडा स्वल्पाऽपि भवति क्वचित् ॥ ६ ॥ अंगारकमहाभाग भगवन्भक्तवत्सल । त्वां नमामि ममाशेषमणमाश विनाशय ॥ ७ ॥ ऋणरोगादिदारिद्र्यं ये चान्ये ह्यपमृत्यवः ।  भयक्लेशमनस्तापा नश्यन्तु मम सर्वदा ॥ ८ ॥ अतिवक्र दुराराध्य भोगमुक्त जितात्मनः । तुष्टो ददासि साम्राज्यं रुष्टो हरसि तत्क्षणात् ॥ ९ ॥ विरिञ्चिशक्रविष्णूनां मनुष्याणां तु का कथा । तेन त्वं सर्वसत्त्वेन ग्रहराजो महाबलः ॥ १० ॥ पुत्रान्देहि धनं देहि त्वामस्मि शरणं गतः ।  ऋणदारिद्रयदुःखेन शत्रूणां च भयात्ततः ॥ ११ ॥ एभिर्वादशभिः श्लोक...

।।चन्द्र स्त्रोत्रम् ।।chandra stotram

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      ॥ चन्द्रस्तोत्रम् ॥ चन्द्रस्य शृणु नामानि शुभदानि महीपते । यानि श्रुत्वा नरो दुःखान्मुच्यते नात्र संशयः ॥ १ ॥ सुधाकरश्च सोमश्च ग्लौरब्जः कुमुदप्रियः । लोकप्रियः शुभ्रभानुश्चन्द्रमा रोहिणीपतिः ॥ २ ॥ शशी हिमकरो राजा द्विजराजो निशाकरः । आत्रेय इन्दु शीतांशुरोषधीशः कलानिधिः ॥ ३ ॥ जैवातृको रमाभ्राता क्षीरोदार्णवसम्भवः । नक्षत्रनायकः शम्भुशिरश्चूडामणिविभुः ॥ ४ ॥ तापहर्ता नभोदीपो नामान्येतानि यः पठेत् । प्रत्यहं भक्तिसंयुक्तस्तस्य पीडा विनश्यति ॥ ५ ॥ तद्दिने च पठेद्यस्तु लभेत् सर्वं समीहितम् । ग्रहादीनां य सर्वेषां भवेच्चन्द्रबलं सदा ॥ ६ ॥                             ॥ इति ॥ 

सूर्यग्रहण मे क्या करे,क्या न?।surya grahan 21june ,2020।क्या है कंकणाकृ...

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सूर्यग्रहण मे करे ये कार्य   आइए जानते हैं आने वाले सूर्य ग्रहण के विषय में ग्रहण में किन मंत्रों स्तोत्रो की उपासना करनी चाहिए?   मंत्र दीक्षा लेनी चाहिए ?   कैसे जल में स्नान करना चाहिए ? दान करना चाहिए? तो चलिए शुरू करते हैं इस ग्रहण के बारे में।यह सूर्य ग्रहण मिथुन राशि में होने वाला कंकणाकृती ग्रहण है और यह ग्रहण भारत में दिखाई देगा। इसका का स्पर्श काल और पूर्ण मोक्ष काल दोनों ही भारत में दिखाई देंगे। इसके बाद भारत में कंकणाकृती ग्रहण 2031 में लगभग 11 वर्षों बाद में दिखाई देगा । सूर्य ग्रहण का समय दिनांक : 21/06/2020 10/03Am to 03/28 pm स्पर्श :10/03 ग्रहण मध्यकाल : 11/41 ग्रहण मोक्ष : 01/32 पूर्ण काल : 03/28 एक अण्डाकार कक्षा में पृथ्वी की परिक्रमा करना पृथ्वी से चंद्रमा को देखते हुए, इसकी कक्षा लगभग 13% छोटी और बड़ी हो जाती है।  जब चंद्रमा पृथ्वी के करीब होता है, तो चंद्रमा की परिक्रमा सूर्य की कक्षा से बड़ी दिखाई देगी।  अगर उस समय सूर्य ग्रहण होता है, तो यह खग्रास होगा। क्योंकि चंद्रमा की परिक्रमा सूर्य की परिक्रमा को पूरी तरह से कवर...

।।सूर्य स्त्रोत्रम्।। surya stotram।।

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                 || सूर्यस्तोत्रम् ॥ नवग्रहाणां   सर्वेषां सूर्यादीनां  पृथक्  पृथक् । पीडा च दुःसहा  राजञ्जायते सततं नृणाम् ॥ १ ॥ पीडानाशाय  राजेन्द्र नामानि  शृणु भास्वतः । सूर्यादीनां च सर्वेषां पीडा नश्यति शृण्वतः ॥ २ ॥ आदित्यः सविता सूर्यः पूषाऽर्कः शीघ्रगो रविः । भगस्त्वष्टाऽर्यमा हंसो हेलिस्तेजोनिधिहरिः ॥ ३ ॥ दिननाथो दिनकरः सप्तसप्तिः प्रभाकरः । विभावसुर्वेदकर्ता वेदाङ्गो वेदवाहनः ॥ ४ ॥ हरिदश्वः कालवक्रः कर्मसाक्षी जगत्पतिः । पद्मिनीबोधको भानुर्भास्करः करुणाकरः ॥ ५ ॥ द्वादशात्मा विश्वकर्मा लोहिताङ्गस्तमोनुदः । जगन्नाथोऽरविन्दाक्षः कालात्मा कश्यपात्मजः ॥ ६ ॥ भूताश्रयो ग्रहपतिः सर्वलोकनमस्कृताः । जपाकुसुमसंकाशो भास्वानदितिनन्दनः ॥ ७ ॥ ध्वान्तेभसिंहः सर्वात्मा लोकनेत्रो विकर्तनः । मार्तण्डो मिहिरः सूरस्तपनो लोकतापनः ॥ ८ ॥ जगत्कर्ता जगत्साक्षी शनैश्चरपिता जयः ।  सहस्ररश्मिस्तरणिर्भगवान्भक् तवत्सलः ॥ ९ ॥ विवस्वानादिदेवश्च देवदेवो दिवाकरः । धन्वन्तरिाधिहर्ता दद्रुकुष्ठविना...

क्या है अजपाजप ?

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अजपाजप ' मानव - शरीर अत्यन्त महत्त्वपूर्ण और दुर्लभ है । यदि शास्त्रके अनुसार इसका उपयोग किया जाय तो मनुष्य ब्रह्मको भी प्राप्त कर सकता है । इसके लिये शास्त्रोंमें बहुत - से साधन बतलाये गये हैं । उनमें सबसे सुगम साधन है — ' अजपाजप ' । इस साधनसे पता चलता है कि जीवपर भगवान्की कितनी असीम अनुकम्पा है । अजपाजपका संकल्प कर लेनेपर चौबीस घंटोंमें एक क्षण भी व्यर्थ नहीं हो पाता – चाहे हम जागते हों , स्वप्नमें हों या सुषुप्तिमें हों , प्रत्येक स्थितिमें ' हंसः'२ का जप श्वास क्रियाद्वारा अनायास होता ही रहता है । संकल्प कर देनेसे यह जप मनुष्यद्वारा किया हुआ माना जाता है । ( क ) किये हुए अजपाजपके समर्पणका संकल्प - ' ॐ विष्णुर्विष्णुर्विष्णुः , अद्य ब्रह्मणोऽह्नि द्वितीयपरार्धे श्रीश्वेतवाराहकल्पे वैवस्वतमन्वन्तरेऽष्टाविंशतितमे कलियुगे कलिप्रथमचरणे जम्बूद्वीपे . भरतखण्डे ... भारतवर्षे .... स्थाने .... नामसंवत्सरे .... ऋतौ ... मासे .... पक्षे .... तिथौ .... दिने प्रातःकाले .... गोत्रः , शर्मा ( वर्मा गुप्तः )अहं स्तनसूर्योदयादारभ्य अद्यतनसूर्योदयपर्यन्त श्वासक्रियया भगवता कारि...

आइये जाने पंचांग के बारे मे | क्या है पंचांग ?

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/ / अथ पंचांग विचार प्रकरण // मुहुर्त का विचार करते समय हमें पंचांग की आवश्यकता होती है पंचांग अर्थात् पांच अंगों का समूह जो इस प्रकार हैं | १ तिथि २ वार ३ नक्षत्र ४ योग ५ करण • अब हम इन पांच अंगों के विषय में विस्तार पूर्वक जानेंगे | (१) तिथि * तिथि अर्थात सूर्य और चंद्र के बीच की दूरी दर्शाने वाली संज्ञा          || पक्षतिथि ज्ञान || शुक्ल कृष्णावुभौ पक्षौ देव पित्रे च कर्मणि | प्रतिपच्च द्वितीया च तृतीया तदनंतरम् || चतुर्थी पंचमी षष्ठी सप्तमी चाष्टमी तथा | नवमी दशमी चैवैकादशी द्वादशी ततः || त्रयोदशी ततोज्ञेया ततः प्रोक्ता चतुर्दशी | पौर्णिमा शुक्लपक्षे तु कृष्णपक्षेत्वमास्मृता || • देव कर्म में शुक्ल पक्ष एवं पित्र पक्ष में कृष्ण पक्ष ऐसे दो पक्ष हैं  उनमें प्रथमा द्वितीय तृतीय चतुर्थी पंचमी षष्ठी सप्तमी अष्टमी नवमी दशमी एकादशी द्वादशी त्रयोदशी चतुर्दशी और शुक्ल पक्ष में पूर्णिमा एवं कृष्ण पक्ष में अमावस्या तिथि का उल्लेख है | (२) वार  * सूर्य उदय होने के बाद अगले दिन सूर्य उदय होने तक के समय को वार कहा जाता है           ...

आइये वेद विषय के बारे मे जाने (घन मन्त्र सुने)

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*वेद मन्त्रो के पाठ के ग्यारह तरीके* चारो वेद के मन्त्रो को लाखों वर्षो से संरक्षित करने के लिए, वेदमन्त्रों के पदो मे मिलावट ,कोई अशुद्धि न हो इसलिए  *हमारे ऋषि मुनियो ने 11 तरह के पाठ करने की विधि बनाई।* *_वेद के हर मन्त्र को 11 तरह से पढ सकते हैं।_* 11 पाठ के पहले तीन पाठ को प्रकृति पाठ व अन्य आठ को विकृति पाठ कहते हैं।      *||प्रकृति पाठ||*  १ संहिता पाठ  २ पदपाठ  ३ क्रमपाठ     *||विकृति पाठ||* ४ जटापाठ ५ मालापाठ ६ शिखापाठ ७  लेखपाठ ८  दण्डपाठ ९ ध्वजपाठ १० रथपाठ ११ घनपाठ          *१ संहिता पाठ*  इसमे वेद मन्त्रों के पद को अलग किये बिना ही  पढा जाता है।  जैसे   अ॒ग्निमी॑ळे पु॒रोहि॑तं य॒ज्ञस्य॑ दे॒वमृ॒त्विज॑म् । होता॑रं रत्न॒धात॑मम् ॥           *२ पदपाठ* इसमें पदो को अलग करके क्रम से उनको पढा जाता है अ॒ग्निम् । ई॒ळे॒ । पु॒रःऽहि॑तम् । य॒ज्ञस्य॑ । दे॒वम् । ऋ॒त्विज॑म् । होता॑रम् । र॒त्न॒ऽधात॑मम् ॥          *३ क्रम पाठ* पदक्रम- १ ...

जन्मदिन मनाने कि पारम्परिक विधि / वर्धापन संस्कार

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शास्त्रों में जन्मदिन मनाए जाने को वर्धापन संस्कार कहा गया है । जन्म तिथि पर इस संस्कार को सम्पन्न किया जाना उम्र बढ़ाने वाला व जीवन में खुशियां लाने वाला होता है । जन्मदिन के दिन किए जाने वाले विधान जन्मतिथि और नक्षत्र से ही जुड़े होते हैं । जन्मदिन के दिन सुबह जल्दी जागना चाहिए । सुबह 4 से 6 के बीच ब्रह्म मुहूर्त होता है । इस समय में जागने से आयु में वृद्धि होती है । मन में गणेश जी का ध्यान करें व आंखे खोलें । सबसे पहले अपनी दोनो हथेलियों का दर्शन करें । नए दिन अच्छे से गुजरे । ये प्रार्थना अपने ईष्ट से करें । धरती माता को प्रणाम करें । तिल के उबटन से नहाएं । नहाकर के साफ व स्वच्छ वस्त्र पहनें । ईश्वर की पूजन करें । प्रथम पूजनीय देवता भगवान गणेश का गंध , पुष्प , अक्षत , धूप , दीप से पूजन करें । लड्डु और दूर्वा समर्पित करें । इस दिन जन्मनक्षत्र का पूजन किया जाता है । जन्मदिन पर अष्टचिरंजीवी का पूजन व स्मरण करना चाहिए । यह पूजन आयु में वृद्धि करता है । : अष्टचिरजीवी अश्वथामा , दैत्यराज बलि , वेद व्यास , हनुमान , विभीषण , कृपाचार्य , परशुराम और मार्कण्डेय ऋषि ये आठ चिरंजीवी हैं ...

| प्रात: उठ कर करे ये नित्य कार्य |

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प्रातः जागरणके पश्चात् स्नानसे पूर्वके कृत्य प्रातःकाल उठनेके बाद स्नानसे पूर्व जो आवश्यक विभिन्न कृत्य है . शास्त्रोंने उनके लिये भी सुनियोजित विधि - विधान बताया है । गृहस्थको अपने नित्य - कर्मोकि अन्तर्गत स्नानसे पूर्वके कृत्य भी शास्त्र - निर्दिष्ट पद्धतिसे ही करने चाहिये ; क्योंकि तभी वह अग्रिम षट् - कर्मकि करनेका अधिकारी होता है । अतएव यहाँपर क्रमशः जागरण - कृत्य एवं स्नान - पूर्व कृत्योंका निरूपण किया जा रहा है ।  ब्राह्म - मुहूर्तमें जागरण -  सूर्योदयसे चार घड़ी ( लगभग डेढ़ घंटे ) पूर्व ब्राह्ममुहूर्तमें ही जग जाना चाहिये । इस समय सोना शास्त्रमें निषिद्ध है ।  करावलोकन -  आँखोंके खुलते ही दोनों हाथोंकी हथेलियों देखते हुए निम्नलिखित श्लोकका पाठ करे  कराग्रे वसते लक्ष्मी : करमध्ये सरस्वती ।  करमूले स्थितो ब्रह्मा प्रभाते करदर्शनम् ॥ ( आचारप्रदीप ) '  हाथके अग्रभागमें लक्ष्मी , हाथके मध्यमें सरस्वती और हाथके मूलभागमें ब्रह्माजी निवास करते हैं , अतः प्रातःकाल दोनों हाथोंका अवलोकन करना चाहिये । ' -  ब्राह्म मुहर...